"वर्षा ऋतु"(रुबाइ)

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 "नाचे  मन का  मोर  मयूरा,  बन  में   कोयल  गाती   है !  वर्षा-ऋतु भी मस्त पवन का  झोंका   लेकर   आती    है !!  फरफर-फरफर उड़े चुनरिया,  धान   ...

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